सीमा पे तुम कब से गए हो.....सैनिक घर भी आ जाओ

दिन, महीनें, बरस हैं बीते, कुछ तो आस बँधा जाओ
सीमा पे तुम कब से गए हो, सैनिक घर भी आ जाओ

बिटिया रस्ता देख रही है, पापा फिर कब आओगे
माँ की आँखे अविरल बहती, कितना उसे सताओगे
पत्नी का भी हाल बुरा है, सपने नए सजा जाओ
सीमा पे तुम कब से गए हो, सैनिक घर भी आ जाओ

पिता बाँचते तेरी चिठ्ठी, शब्द शब्द बनते मोती
साथ बुढ़ापा कब तक देगा, सोच सोच आँखें रोती
भाई के सपनों को भी तुम, ख़ुशियाँ पंख लगा जाओ
सीमा पे तुम कब से गए हो, सैनिक घर भी आ जाओ

बचपन वाले बरगद दादा, बाँहों में भरना चाहे
गलियाँ कूचे व्याकुल होकर, तुझसे फिर मिलना चाहे
दहक रहे इस गुलमोहर की, अब तो प्यास बुझा जाओ
सीमा पे तुम कब से गए हो, सैनिक घर भी आ जाओ

तुम ना आये, पर आई ये खबर तेरी शहीदी की
गर्वित सीने हुए हैं चौड़े, अँखिया धार बहा दी थी
घर वालों की चुप्पी कहती, ढांढस जरा दिला जाओ
बिन बोले क्यूँ दूर गए तुम, सैनिक वापस आ जाओ

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
बैतूल

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