सीमा पर रहते हो पापा माना मुश्किल है अब आना

सीमा पर रहते हो पापा
माना मुश्किल है अब आना
कितना याद सभी करते हैं
चाहूँ मैं बस ये बतलाना

दादी बाबा की आँखों में
इक सूनापन सा दिखता है
मम्मी का तकिया भी अक्सर
मुझको गीला सा मिलता है
बात तुम्हारी तस्वीरों से
ये सब करते ही रहते हैं
गले मुझे लिपटा लेते ये
जब चाहूँ मैं कुछ समझाना…..
कितना याद सभी करते हैं
चाहूँ मैं बस ये बतलाना

मेरा तो बचपन ही पापा
तुमसे ढँग से नहीं मिला है
मगर गर्व है मुझको तुम पर
कोई मन में नही गिला है
पर बच्चों के मम्मी पापा
जब टीचर से जाकर मिलते
तब मुश्किल हो जाता मेरा
रोक आँसुओं को यूँ पाना….
कितना याद सभी करते हैं
चाहूँ मैं बस ये बतलाना

सीमा पर गोलीबारी की
जब भी मैं खबरें सुनती हूँ
डरी डरी मम्मी के सँग मैं
टी वी से चिपकी रहती हूँ
बजे फोन की घंटी जब भी
माँ घबरा घबरा जाती है
गुमसुम सी बैठी रहती वह
भूल गयी खुलकर मुस्काना….
कितना याद सभी करते हैं
चाहूँ मैं बस ये बतलाना
डॉ अर्चना गुप्ता

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