सिला देना

कभी यूँ रूठकर हमको मुहब्बत का सिला देना
मनाऊँ आपको हर छन न फिर से यूँ थका देना

घुमड़ बदरा कहे जब हाल तेरे इश्क का हमसे
नयन के इन झरोखों झाँक अपने को समा देना

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