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सिर्फ तुम/मंदीप

सिर्फ तुम/मंदीपसाई

तारो में तुम
फिजाओ में तुम
हो चाँद की चादनी में तुम।
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बागो में हो तुम
बहरों में हो तुम
फूलो की खुशबुओं में हो तुम।
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रास्तो में हो तुम
गलियो में हो तुम
सड़क के हर मोड़ हो तुम।
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मेरे हर अर्फ में हो तुम
मेरे हर शब्द में हो तुम
मेरी भाषा में हो तुम।
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मेरी जुबा पर हो तुम
मेरी आँखो में हो तुम
मेरी आँसुओ में हो तुम।
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मेरी महबूबा हो तुम
मेरी प्रेमिका हो तुम
और मेरा दिलबर भी तुम।
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मेरी कविता में हो तुम
मेरी गजल में हो तुम
मेरी कहानी में हो तुम।
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मेरा मान हो तुम
मेरा अरमान हो तुम
मेरा सपना हो तुम।
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मेरी सोच में हो तुम
मेरी बातो में हो तुम
मेरी कल्पना में हो तुम।
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मेरी ऋतू हो तुम
मेरी परी हो तुम
मेरा साई भी हो तुम।
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मेरे पास हो तुम
मेरे खास हो तुम
मेरे हमेसा साथ हो तुम।
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मेरे हाल में हो तुम
मेरे दुःख में हो तुम
मेरे सुख में हो तुम।
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मेरे जहन में हो तुम
मेरे दिमाग में हो तुम
मेरे दिल में हो तुम।
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मेरी सासों में हो तुम
मेरी रूह में हो तुम
मेरे मन में हो तुम।
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मेरी आन हो तुम
मेरी सान हो तुम
मेरा मान हो तुम।
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मेरी आस हो तुम
मेरा साहस हो तुम
मेरा होसला हो तुम
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मेरे दिन में हो तुम
मेरे कल में हो तुम
मेरे आज में हो तुम
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मेरे काल में हो तुम
मेरे वर्तमान में हो तुम
मेरे भविष्य में हो तुम।
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मेरा शिव हो तुम
मेरा राम हो तुम
मेरा ठाकुर भी हो तुम।
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मेरी आत्मा हो तुम
मेरी परमात्मा हो तुम
मेरा परमेश्वेर हो तुम।
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मेरे जीवन में हो तुम
मेरे मरण में हो तुम
मेरे अंत में हो तुम।

मंदीपसाई

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Mandeep Kumar
Mandeep Kumar
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नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने...