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सिमटती मोहब्बत

Ashutosh Jadaun

Ashutosh Jadaun

मुक्तक

August 8, 2017

साल दर साल सिमटती मोहब्बत
इस कदर “आशुतोष”
दिल मे धुंआ रख लोग
वफ़ा ढूढ़ते हैं ।
कश्ती मझधार मे डूबी
तब किस्मत को बेवफा मान
तारनहार ढूढ़ते हैं ।
गिला किस्मत का नही
खुद की गई बेरुखी जिंदगी
अब वो ओस मे भी
तपन ढूढ़ते हैं ।।

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Author
Ashutosh Jadaun
स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है... Read more

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