मुक्तक · Reading time: 1 minute

साक़ी

साक़ी, ना पिला इतना कि हम रास्ता बहक जाये।
होश में आएं और खुद को ख़ुद ही भूल जायें ।।

मेरा गम मुझे गिलास में पानी मिलाकर पिला दें ।
मुझे हाथ में दे और ये जहां शराब बनाकर पिला दे ।।

ना मिला पानी इतना कि शराब ही खो जाये ।
मेरा दर्द बहुत ज्यादा है, कहीं पानी शराब ना हो जाये ।

दोस्त ने पिलायी है मोहब्बत से अब और ना पिला ।
शराब तो बहुत पी है, आज दोस्ती का चढ़ने दे नशा ।।

कल रात तेरी गली में ठहरा और छत पर तेरा आना ना रहा ।
मेरा दर्द कोई जान लेता, प्याज छीलने का सारा दिन बहाना रहा।।

शुक्रिया तेरा साक़ी, मेरे आँसू तूने शराब बना दिए ।
ऐसे झलके मेरी आँखों से, गिलास भर तूने जाम बना दिए।।

तेरे हाथ गोरे है या काले, साक़ी क्या फ़रक़ पड़ता है ।
तू गम को को भुला देती है, यही तेरे हाथों की सफ़ा है ।।

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