कविता · Reading time: 1 minute

साहिर – अमृता

साहिर के सेल्फ में परी
अमृता की जूठी कप
कभी धोई नहीं गई
कप के होठों पे वो सुर्ख बोसा
सदैव जवान रहा
बाद अमृता और साहिर के भी…
~ सिद्धार्थ

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