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साहित्य की भूमिका

Rajesh Kumar Kaurav

Rajesh Kumar Kaurav

कविता

May 23, 2017

साहित्य देता रहा सदा से,
दिशा देश अौर समाज को ।
साहित्यकार बदल देता है,
चिन्तन ,चरित्र,व्यवहार को।।
राष्ट्र को मिलती रही चेतना,
समाज भी चैतन्य होता है।
साहित्य सम्पर्क व सांनिध्य,
युग परिवर्तन कर सकता है।।
समझें पुरातन साहित्य को,
जो जीवन बोध कराता है।
जीवंत देव प्रतिमाअों सा,
घर घर पूजा जाता है।।
राजाश्रित साहित्यकारों ने,
राजधर्म का निर्बाह किया।
वीर रस की लिख गाथाएँ,
युद्ध भय से वीरो को दूर किया।।
संस्कृति पर भी जब हुए आघात,
साहित्यकारो ने सीना तान दिया।
भक्तिरस की रचनाओं से,
आक्रॉताओं को निराश किया।।
स्वाधीनता प्राप्ति के दिनों भी,
कलम की ताकत दिखलाई है।
देशभक्ति पूर्ण साहित्य रच,
पथ प्रदर्शक भूमिका निभाई है।।
पर अब बुद्धिमानी भटक गयी,
साहित्य से जीवन बोध नदारद है।
सरोकार अब कम समाज से,
प्रतिष्ठा पाने की ही चाहत है।।
जनभावनाओं से दूर हटरहा,
संवेदना हीन हुआ साहित्य है।
साहित्यकार हो गये लाखो में,
पर सद्साहित्य लाखो में एक है।।
समयानुकूल सृजन की आशा,
समाज आज भी करता है।
सामयिक सत्य पर चलें कलम,
नवीन विचारों की आवश्यकता है।
राजेश कौरव “सुमित्र”

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