साहस में शक्ति अपार

हिम्मत से काम लेना,
ये वक़्त बड़ा है भारी।
कोहराम मचा दुनिया में,
फैली है माहमारी।।1।।

खुद को बचाये रक्खो,
अपनो की करलो फिक्र।
न जाने किस घड़ी में,
आ जाये किसकी बारी।।2।।

घर की लकीर को तुम,
हरगिज़ न पार करना।
इस एक गलत कदम से,
भुगतेगी दुनिया सारी।।3।।

मोदी जी ने जो कहा है,
तुम् उसका मान रख लो,
अब ये काम है हमारा,
है ये सबकी ज़िम्मेदारी।।4।।

स्वरचित
तरुण सिंह पवार

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साहित्य समाज का दर्पण होता है इसी दर्पण में भिन्न भिन्न प्रतिबिम्ब दिखाई देते है...
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