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सास बिना ससुराल ना होता

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

August 11, 2017

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सास बिना ससुराल ना होता,
सुना बंगला खंडहर सा होता।
सास से समाज मे है मर्यादा,
ये तो घूँघट है बहु के सर का।
जो बहु की हर एक गलती ,
दुनिया के सामने सदा ही ढकती।
ये रिस्ता कुछ नोकझोक का,
है दुनिया में बड़ा अनोखा।
जो बतलाती घर का रीति-रिवाज,
सास से ही सजती है तीज-त्योहार।
सास-ससुर के अाशीर्वाद से ही,
पुत्र-बहु का जीवन फलता-फूलता।
????—लक्ष्मी सिंह?☺

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Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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