सावन

देखो नील गगन में कैसा मनोरम दृश्य है
उदित हुआ सुर्य नभ में तारादल अदृश्य है
भानु रश्मि बिखरे नभ से धरा तक
मानों द्वार पर जगा रहा नव आगन्तुक
पुष्प होकर प्रफुल्लित करता स्वागत
भंवर गुज़ार कर छेड़ रहा अपनी तान
वर्षा की बूंदों की लग रही झड़ी
मधुर गान गाने कोयल डाल पर खडी
धरा ओढ़े हुए हरित वर्ण चुनर सुहानी
देखो आज गई सावन की रुत मस्तानी

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