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सावन

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

कुण्डलिया

August 1, 2016

सावन भादो तुम जरा ,बरसो दिल के गाँव
तपन जरा इसकी हरो , बादल की दो छाँव
बादल की दो छाँव,थके गम सहते सहते
सूख गए हैं अश्क,सभी अब बहते बहते
दिल को है विश्वास , खिलेंगे अपने तन मन
खुशियों की बरसात, करेगा जब ये सावन

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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