गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

सावन रातों में तुमबिन तन्हा गुजारा है

सावन रातों में तुमबिन तन्हा गुजारा है
बसंत आगमन तेरे आने का इशारा है

तुझे याद कर कभी हँसना कभी रोना
तसव्वुर में खो जाना आदत हमारा है

तूने दी थी निशानी बिछड़ने के पहेले
पुरानी खत,तस्वीर जीने का सहारा है

वो बचपन की बाते याद जरा कर
मेरी ज़िंदगी रंगी नदिया, तू किनारा है

ये जाने वफ़ा लौट आ मेरे शहर
दिल ने तुम्हें आज फिर पुकारा है

कौन कहता है तुम्हें भूल गये है
जुबाँ में बस एक नाम तुम्हारा है

40 Views
Like
You may also like:
Loading...