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सावन मन भावन

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 4, 2017

सुबह सुखद शीतल बेला मे
सुन्दर प्रकृति दिखे मनभावन
सजल गगन मे ऩभ आच्छादित
सब मिलते तो बनता सावन
सरसिज पूरित हुआ सरोवर
शिव की पूजा हो सुखदायक
शैशव बचपन चहके झूलो पर
सावन लगता है मनभावन विन्ध्यप्रकाश मिश्र

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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