सावन-भादो

सावन भादो तुम जरा ,बरसो दिल के गाँव
तपन जरा इसकी हरो , बादल की दो छाँव
अश्कों ने बहकर हरे, थोड़े दिल के दर्द
तुम भी आ खेलो जरा , खुशियों के कुछ दाँव

डॉ अर्चना गुप्ता

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी प्यारी लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद भी,...
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