सावन के पर्व-त्योहार

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सावन लाया है सखी, कई पर्व – त्योहार।
छिपा हुआ हर पर्व में, जीवन का आधार।।१

सावन पावन माह में , है हरियाली तीज।
घर-आँगन झूले पड़े, व्यंजन बने लजीज।। २

मिल जुल झूला झूलती, सखी-सहेली संग।
हरियाली सावन सखी, मन में भरे उमंग।। ३

सावन आया झूम के, हरने सबकी पीर।
माल पुए के संग में, बनी श्रावणी खीर।।४

,लोक-गीत से है सजी,कजरी का त्यौहार।
फूट पड़े नव कंठ से,विरह ,मिलन मनुहार। । ४

जाति-धर्म को जोड़ता, रेशम के दो तार।
रक्षा बंधन पर्व है, भ्रातृ-बहन का प्यार।। ५

होता सावन माह में,नागपंचमी पर्व।
नागदेव को दूध से, करते पूजन सर्व।। ६

शिवमय सावन माह की, महिमा अपरंपार।
काँधे काँवर को लिए,जाना शिव के द्वार।। ७

भारत में त्योहार का, बहुत बड़ा स्थान।
जिसमें होता है सदा, धर्म-कर्म का मान।।८
-लक्ष्मी सिंह

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