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सावन के झूले

दिनेश एल०

दिनेश एल० "जैहिंद"

कविता

July 10, 2017

सावन के झूले
// दिनेश एल० “जैहिंद”

आओ सखियों ! झूला झूलें,
पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें ।
चलो चलें हम जी भर खेलें,
झूम-झूम खूब मज़े ले..लें ।।

आओ करें खुद की मनमानी,
अनसुनी करें ओरों की बानी ।
झूला झूलने को हमने ठानी,
आज हो जाए हमसे नादानी ।।

चलो चलें अब झूला डालें,
झूल-झूल कर मस्ती पा-लें ।।
झूम-झूम कर कजरी गालें,
गीत सावन के गुनगुना लें ।।

बूँदें बारिश की हमसे बोले,
मन की हमरे राज़ जो खोले ।।
पायल, चूड़ी खनके, डोले,
बोले…खेलो सावनी हिंडोले ।।

=== मौलिक ====
दिनेश एल० “जैहिंद”
28. 06. 2017

Author
दिनेश एल०
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का... Read more
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