Jun 10, 2021 · कविता
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सावन की बरसात

वो कड़कड़ाती बिजलियां
छत से टपकता पानी
मुझे आज भी याद है
बचपन की वो बरसात ।

हाथों मे कागज की किश्ती
और गलियों की नदियां
आसमान मे चमकता इन्द्रधनुष
और वो अविरल बरसात ।

चमन की उठती महक
मिट्टी की सोंधी खुशबु
प्यासे पत्तों पर पड़ती
पानी की वो बरसात ।

झूम उठते थे दोनो
बचपन और जवानी
जब लौट के आती थी
सावन की वो बरसात ।

मुझे आज भी याद है
बचपन की वो बरसात ।।

राज विग 10.06.2021

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Raj Vig
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