Skip to content

सावन का मौसम ( दोहे )

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

दोहे

September 17, 2017

कारे कारे बादरा ले गयी पवन उड़ाय।
ना बरखा ना साजना सावन सूखो जाय।

रंगीलो सावन आयो , धरा हरी चुनरिया।
गगन हो गया मस्त मगन, बरसे है बदरिया।।

देख के बुंदियाँ बारिश की, यूं मन मोरो रोय।
बरखा की पुरवा तेरी, याद दिलावत मोय।।

मौसम है यह सावन का,रोवत हम दिन रैन।
बिन तुमरे हर पल रहता, मनवा मेरा बेचैन।।

–रंजना माथुर दिनांक 29/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
©

Share this:
Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
Recommended for you