Nov 4, 2019
कविता · Reading time: 1 minute

सारा नशा उसका उतर गया होगा ।

सारा नशा उस का उतर गया होगा ।
जब वो किसी और के घर गया होगा ।।

हर कोई माफ़ नहीं करता नादानी ।
मुमकिन है वो अब सुधर गया होगा ।।

वादियों ने नाम से पुकारा होगा ।
गर भूल से भी वो उधर गया होगा ।।

जो बेकसूर था मगर खामोश रहा ।
वो अन्दर से कितना मर गया होगा ।।

ये निशां बाकी तो ताउम्र रहेगा ।
वक्त से उनका ज़ख्म भर गया होगा ।।

अपना होना इक दिखावा था ‘सागर’ ।
वादों से अगर वो मुकर गया होगा ।।

-सुरेन्द्र ‘सागर’

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