दोहे · Reading time: 1 minute

सारथी

खुद ही अर्जुन कृष्ण हूँ,है जीवन संग्राम ।
बनकर अपना सारथी,लड़ूँ युद्ध अविराम।। १

स्वयं समय रथ हाँकता,धैर्यवान रथवान।
शूरवीर होता वही, पाता है सम्मान।। २

जीवन रथ का सारथी,चला प्रलय की राह।
सह जाऊँ हर वेदना, बस मंजिल की चाह।। ३

अगर मित्र हो कृष्ण-सा,देता पग-पग प्रीत ।
बन जाता है सारथी,तय है निश्चित जीत।। ४

एक मित्र हो कृष्ण-सा,देता सच्चा ज्ञान।
जीवन रथ को हाँकता, बन जाता रथवान ।। ५

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