कविता · Reading time: 1 minute

सादगी

मोहताज
होती नहीं
सादगी
तारीफों की

सादगी
एक मिसाल है
कर्मठ
इन्सान की

सादा जीवन
जी कर
इन्सान पहुँचता है
बुलंदियों पर
कलाम, शास्त्री
जैसे इन्सान है
एक मिसाल

बिना दिखावे के
इन्सान दिखता है
खूबसूरत
चेहरे को सजाना
तो
एक फरेब है
एक धोखा है
असलियत जब
आती है सामने
दोमुहे इन्सान की
तब खुलती पोल है

सादगी है
बहू का
श्रृंगार
सादगी है
संस्कारों की
पहचान

सादगी से
जीना सीखो
इन्सान
जीवन-पथ होगा
आसान

लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम पर है । यूनियन बैंक मे कार्यरत के दौरान बैंक के मैगज़ीन, भारतीय रिजर्व बैक…
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