Jul 31, 2016 · कविता
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साथ

जिनके साथ चले हम घर से
वे तो दूर बड़े रे निकले
सोचा चोट अब स्वस्थ हो गई
देखा घाव घनेरे निकले
जिनको समझ रौशन सूरज
वो घोर अँधेरे निकले
सोचा कुछ नई भाषा सीखें
वे तो मोर बटेरे निकले

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Dr.pratibha prkash
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डॉ प्रतिभा प्रकाश पुत्री/श्री वेदप्रकाश माहेश्वरी स्थायी पता मो.राधाकृष्ण ग्राम/पोस्ट अलीगंज जिला एटा उत्तर प्रदेश... View full profile
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