कविता · Reading time: 1 minute

साथ उनका जो मिला

साथ उनका जो मिला मानो मेरी दुनिया थम गई
मेरे रातों को जैसे चांद की रोशनी मिल गई

उसका यह छुप छुप कर देखना
बातें किसी और की ,लबों पर मेरे नाम का आना

बोलकर उसकी नजर का झुक जाना
और मेरी नजर का भी शर्माना

कब कैसे यह सिलसिला बढ़ता गया
मैं उसकी और वह मेरा होता गया

हर बात में उसकी मेरी फिक्र होती थी
मेरा कभी बात ना करना उसे बेचैन करता था

न वह कहता था ना मैं कहती थी
इस शिकायत को बस नजरें बयां किया करती थी।।

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