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*** तेरी गली में हम***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गीत

May 22, 2017

आये है घर छोड़ के अपना
साजन तेरी गली में हम
मिले चाहे ख़ुशी या ग़म
अपना घर छोड़ आये हम
मिलना अब हम तुम सनम
हम रहे ना हम तुम रहो तुम
साजन तेरी गली में हम
छोड़ सारे जहां को आये हम
चाहत में तेरी हम लूट गये
ये भी क्या किसी से कम
साजन तेरी गली में आये हम
कम से कम नज़रें करम कर
वरना जी ना पायेंगे हम
छोड़ बाबुल का घर
चले आये समझ अपना घर
मौत आने से पहले
अब ये निकले ना दम
मैंने चाहा है तुझको
ये क्या है कम
साजन तेरी गली में आये हम
छोड़ अपने बाबुल का घर
साजन तेरी गली में हम ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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