.
Skip to content

साकी तेरा काम है कैसा

Mahendra singh kiroula

Mahendra singh kiroula

कविता

April 27, 2017

कैसा जीवन यापन करता
वो सबके पात्रों को भरता
समाज और परिवार के साथ
समय बिताने को वो मरता .

दिनचर्या को अपनी भूलकर
आधुनिक जीवन का हिस्सा बनकर
लोगो का मनोरंजन करके
रोज कोई नया किस्सा बनकर

साकी तेरा काम है कैसा
दुनिया मे बदनाम है जैसा

रक्षाबंधन का बंधन भी
थाली मे रखा चन्दन भी
दीपमाला आयी बुझने को
सखी के पैरो की छनछन भी

अब बहुत गए दिन बीते रातें
कल फिर भी सुधरा न तेरा
उलटी चक्री समय घुमाए
आखिर मे कुछ भी न पाये

प्रकृति के खिलाफ चलोगे
स्वास्थ्य तेरा मजधार मे आये .
मंत्र न ऐसा कोई अबतक
जो तेरा संतुलन कर पाये

सूर्योदय से बैर है जैसा
साकी तेरा काम है कैसा

हिसाब गलत हो जाये न बूँद का
चाहे सारे प्रहर बीत जाए
कल तो शुरू हो चूका आज ही
धन आये पर करुणा न आये

इनाम जो पाया सेवा देके
अतिथि को भी हर क्षण भटकाया
उसके होश का सौदा करता
तेरे पाप को वो नहीं भरता

दुनिया मे सबकुछ नहीं है पैसा
साकी तेरा काम है कैसा

सावन के झरने रूठे है
वो आश्चर्य मे पड़े हुए है
नया साल कब आया बीता
हम उस कोने मे ही खड़े है .

सब चले गए जगह से ,
आनंद की अनुभूति करके
लक्ष्मी का उपयोग न समझे
जलकर उसको बभूती करके .

आजाद हुआ फिर लगता क्यों ये , चारो तरफ शमशान है जैसा
साकी तेरा काम है कैसा

Author
Recommended Posts
* प्रभु वन्दना * तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ?
Neelam Ji कविता Jul 19, 2017
तेरा मेरा प्रभु ये कैसा नाता है ? तेरे बिना न कुछ भी मुझको भाता है , देखे बिन तुमको नहीं दिल ये बहलता है... Read more
झूठा निकला क़रार तेरा
झूठा निकला क़रार तेरा अब कैसा इंतज़ार तेरा रात भर मोती आते रहे ऐसा है आज इंकार तेरा मयकदे से दोस्ती कर ली अब नही... Read more
कविता:ये प्यार कैसा
स्वार्थ में बंधा है तो फिर प्यार कैसा। शर्त मे अंधा है तो फिर प्यार कैसा। हँसते हँसाते जीवन रंगीन बना दे जो, उसपर लुटा... Read more
पूछें तुमसे एक प्रश्न माँ
पूछें तुमसे एक प्रश्न माँ तेरा न्याय बता कैसा जी न सकें क्यों हम भी भैया जीवन जीए जैसा। वे आए तेरी कोख में तो... Read more