साईकिल

आज रामू की बिटिया का जन्मदिन था और फटेहाल रामू एक नयी चमचमाती हुई साइकिल लेकर घर आया था जिसे देखते ही उसकी १२ वर्षीया बेटी रेनू उससे लिपट गयी और साइकिल से खेलने लगी | आवाज सुनकर रामू की पत्नी नंदा भी बाहर आ गयी, देखा घर में एक नयी छोटी साइकिल आई थी लेकिन रामू की साइकिल कहीं दिखाई नहीं दे रही थी |

नंदा ने पूछा ,”सुनो जी, तुम्हारी साइकिल कहीं दिखाई नहीं दे रही और तुम्हारे कपडे फटे हुए कैसे हैं ?”

नंदा का सवाल सुनते ही रामू की आँखों में सुबह का दृश्य घूम गया, जब वो जंगल से होकर काम पर जा रहा था और कुछ बदमाशों ने उससे मारपीट करके सारे पैसे छीन लिए थे जो उसने अपनी बेटी की साइकिल के लिए पूरे एक साल तक मेहनत करके बचाए थे जिसके लिए उसकी बेटी कई दिनों से जिद कर रही थी क्योकि उसको २ किमी दूर स्कूल में पढने पैदल ही जाना पड़ता था | और कैसे वो आज अपनी साइकिल बेचकर और कुछ पैसे उधार करके साइकिल खरीद ही लाया था |

रामू को सोच में डूबा देख नंदा ने अपना सवाल दोहराया तो रामू ने कहा, “रास्ते में भी कितने गड्ढे हो गए हैं चलना भी मुश्किल हो गया है, सुबह साइकिल से गिर गया था तो साइकिल में टूट फूट हो गयी थी, मिस्त्री को दे आया हूँ बोल रहा था सामान नहीं है हफ्ते भर बाद ही ठीक हो पाएगी |” और साइकिल पाकर खुश होती बेटी के सर पर हाथ फेरकर लाड करने लगा और खारे पानी की आँखों से बाहर आती हुई बूंदों को अपने अन्दर ही छुपा गया |

“सन्दीप कुमार”
मौलिक और अप्रकाशित

ब्लॉग : https://sandeip01.blogspot.in

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3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना"... View full profile
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