साईं, आन पड़े हम तेरे धाम

साईं सलोना रूप है, साईं हरि का मान
देह अलौकिक गंध है, प्रेम अमर पहचान // दोहा //

साईं, साईं, आन पड़े हम तेरे धाम
साईं, साईं, आन पड़े हम तेरे धाम
मोहे तुझसे पड़ा है काम // मुखड़ा //
साईं, साईं, आन पड़े….

आज मोहे तू अंग लगा ले
सीने में ऐसी उमंग जगा दे
छूटे कभी न वो रंग लगा ले
बाबा, हर पल जपूँगा तेरा नाम // १. //
साईं, साईं, आन पड़े….

दुखियों की ख़ातिर दुनिया में आया
चारों तरफ़ है तेरी ही माया
कोई भी तेरा पार न पाया
बाबा, मोहे दे दो भक्ति का दाम // २. //
साईं, साईं, आन पड़े….

मन में बसा लो, तन में बसा लो
इक बार मुझे बस, अपना बना लो
प्यार से अपने, शरण बुला लो
सोचो न अब, मेरा करो तुम काम // ३. //
साईं, साईं, आन पड़े….

राम रहीम भी तू ही है बाबा
तू ही काँशी, तू ही काबा
तुझसे बड़ा न कोई बाबा
साईं जपते रहे सब तेरा नाम // ४. //
साईं, साईं, आन पड़े….

भावों का है बंधन तुझसे
जीवों में है जीवन तुझसे
भोरों की है गुंजन तुझसे
बाबा, दे दो हमें वरदान // ५. //
साईं, साईं, आन पड़े….

पास तू रखना तारा बनाकर
मुझको सबसे न्यारा बनाकर
भक्तों में सबसे प्यारा बनाकर
साईं, सबसे बड़ा है तेरा नाम // ६. //
साईं, साईं, आन पड़े….

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