साइबर रेड

साइबर रेड-“कहानी”

पुलिस बल का आगमन हो गया । तलाशी अभियान जोरों पर था ,साथ में ,अफवाहों का बाजार गर्म था।शहर में साइबर अपराध चर्चा का विषय बन गया।
। साइबर अपराध उस अपराध को कहते हैं जो इंटरनेट बैंकिंग पर आधारित होता है। हमारा देश विश्व पटल पर उभरती सशक्त अर्थव्यवस्था वाला देश है। देश में वर्तमान व्यवस्था पूर्ण रूप से नहीं, पर अधिकतर नेट बैंकिंग पर आधारित है ।देश में वित्त विनिमय आसान हो गया है ,किंतु ,इस विनिमय की पृष्ठभूमि में कुछ असामाजिक तत्व ,अपराध को व्यवसाय का रूप देकर, धन लोलुप बन गए हैं ।जिले में कई साइबर कैफे हैं ,जो नेट बैंकिंग का कार्य करते हैं।

अजगर और अजहर दोनों मित्र थे। वह आईटीआई से डिप्लोमा कोर्स कर अपना व्यवसाय चलाते थे ।साइबर कैफे में रोजाना अच्छी आय होती थी। किंतु मनुष्य की मानसिक दुर्बलता कहें या कामना ,अच्छा खासा शिक्षित युवा वर्ग अपने मार्ग से भटक जाता है। बुरी संगत में पड़कर धन उपार्जन के नित्य नए साधन ढूंढता है ।इस ऊहापोह में उसे यह भी ध्यान नहीं रहता, कि,उसने जो मार्ग चुना है ,वह उचित है या अनुचित। धन कमाने की लालसा उसे व्यवसाय की सभी कमियों और न्याय व्यवस्था की संभावनाओं से अवगत कराती है।वह अपने मान सम्मान को ताक पर रखकर कुत्सित मार्ग का पथिक बन जाता है ।

अजगर वअजहर साइबर कैफे में गलत गतिविधियों का संचालन करने लगे थे। उससे वह अल्प समय में मालामाल हो गये।

धन का उपार्जन आसान है, किंतु, उसका नियोजन आसान नहीं ।गलत प्रकार से कमाई गयी, काली कमाई दुर्व्यसनों को जन्म देती है ।जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा गिरती है। व्यक्ति संदेह के दायरे में हमेशा रहता है।

अजहर ने लग्जरी कार क्रय की थी। देर रात तक शराब, नाच -गानों में उसका समय गुजरता था ।अजगर ने विशाल काय कोठी क्रय की थी। अल्प समय में ही ,इतना धन वैभव उन्होंने बना लिया था ,कि ,पड़ोसी दांतो तले उंगली दबाते, व दबी जुबान से उन दोनों पर आरोप लगाते थे।

एक दिन अजगर के साइबर कैफे के सामने भीड़ जमा हो गयी।पुलिस प्रशासन ने छापा मारा । अजहर और अजगर के फोन सर्विलांस पर थे। उस से ज्ञात हुआ कि दोनों का संबंध विदेशों की आपराधिक संस्था से है, जो, भारत में वित्तीय अपराध करती है। यह एक संगठित साइबर अपराधिक गिरोह था, जिसके सदस्य अजगर वअजहर थे।उन्होंने विगत वर्षों में कई साइबर अपराध के द्वारा लाखों के वारे न्यारे किए थे। जिसका उपभोक्ता को कुछ पता नहीं चला था। बैंक में शिकायत के बाद पुलिस पड़ताल से कुछ नतीजा नहीं निकला था। अतः अपराधियों के हौसले बुलंद थे।

उक्त दिन सबूत सहित पुलिस ऑफिसर ने दोनों अभियुक्तों को पकड़ा ।साइबर कैफे सीज कर दिया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ ,कि अजगर व अजहर की रातें काफी रंगीन हुआ करती थी। काला धन जुएं, शराब और सुंदरी पर खर्च करने के बाद भी इतना पर्याप्त धन था कि, परिवार का भरण पोषण वैभव पूर्वक कर सकें।
दोनों मित्रों को भरोसा था ,कि, वकील मित्रों के सहारे वह जमानत पर रिहा हो जाएंगे ।उनके पास धन की कमी नहीं थी ।किंतु, न्यायालय ने उनकी एक न सुनी, और ,देश- विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का सबूत मिलते ही, उन्हें कारावास में ठूंस दिया गया।

धन कम हो तो ,संतोष करना चाहिए। अधिक हो तो, सामाजिक व धार्मिक कार्यों में खर्च करना चाहिए। किंतु जब धन का केंद्र व्यक्ति , स्वार्थ व ऐश्वर्य होता है ,तो, व्यक्ति का पतन निश्चित हो जाता है।

डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, “प्रेम”

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