साइंटिफिक अप्रोच ( लघुकथा)

*साइंटिफिक अप्रोच*

संध्या पूजन करके जब दादा जी अपने बिस्तर पर बैठे तो समृद्धि और औचित्य उनके पास पहुँचे और बोले, दादा जी आपकी पूजा खत्म हो गई ?
उन्होंने कहा, हाँ बच्चों खत्म हो गई । कोई काम था क्या मुझसे?
हाँ, दादाजी बहुत दिनों से आपने हमें कहानी नहीं सुनाई। हम कहानी सुनना चाहते हैं। दिन भर टी वी देखकर और मोबाइल पर गेम खेलकर बोर हो गए हैं। प्लीज दादा जी , आप हमें कहानी सुनाइए न।
ठीक है, ठीक है, बैठो अभी सुनाता हूँ।
वैसे भी दादा जी कभी-कभी बच्चों को अपने पास बैठाकर कहानियाँ सुनाते थे और बच्चे बड़े चाव से कहानियाँ सुनते भी थे।
वे बोले ,देखो समृद्धि और औचित्य मैं तुम दोनों को आज पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाने वाला हूँ, जिनसे हमें जीवन मूल्यों की शिक्षा मिलती है।
इसी बीच उनकी बहू आकर बोली, क्या पिता जी आप भी बाबा आदम के जमाने की कहानियाँ सुनाते रहते हैं। आज बच्चों को साइंटिफिक अप्रोच वाली कहानियाँ सुनानी चाहिए जो बच्चों को भविष्य के लिए तैयार कर सकें।
दादा जी बोले,” बहू ये सब तो बच्चे सिलेबस से सीख लेंगे।आज बच्चों को ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो उन्हें नैतिकता और संस्कारों से परिचित करा सके।आगे चलकर बच्चे तभी कामयाब होंगे जब वे सुशिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान होंगे।”
“साइंटिफिक अप्रोच को सिखाने की आवश्यकता बच्चों को नहीं, आजकल के माता-पिता को है,जिससे उन्हें ये पता चल सके कि बच्चों का पालन-पोषण किस तरह करना है।”
डाॅ बिपिन पाण्डेय

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साहित्य अध्येता Books: साझा संकलन कुंडलिनी लोक (संपादक - ओम नीरव) संपादित दोहा संगम (दोहा...
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