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सांवलो सलोनो सावन

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

August 30, 2017

कविता – – सांवलो सलोनो सावन
विधा-वर्ण पिरामिड


कारे
बदरा
बरसो रे
आयो सावन
उड़े लहरिया
गोरी झूले झूलना।

छा
गये
बादल
काले काले
पी के दरस
को तरस गए
अब नैन हमारे।


गया
मौसम
अब देखो
हरियाली का
नाचे मन मोर
किसी मतवाली का।

–रंजना माथुर दिनांक 27/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना)
@copyright

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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