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" ---------------------------------------------- साँसों के मधुवन से " !!

मुस्कानों को सरल बनाना , सीखे कोई हमसे !
मर्यादा में रहना भी है , सचमुच हमें कसम से !!

लम्हों को गुलज़ार बना दें , ऐसे जादूगर हैं !
आसपास परिहास सिमटता , आँचल लिपटे तन से !!

उमड़ घुमड़ कर रूप सलोना , ऐसे छा जाता है !
नज़रें नहीं मिला पाते हैं , हम तो खुद दर्पण से !!

आंखों में अचरज यों तैरे , सब के भाव बदलते !
उम्र यहां उछला करती है , मतवारे नयनन से !!

अनगढ़ औ सयाने सब यहां , राय दिये जाते हैं !
हमें जीतना हैं गढ़ सारे , साधे सही जतन से !!

आंखों में उल्लास छिपाये , भाल सदा उन्नत है !
खुशबू यहां बिखेरा करते , सांसों के मधुवन से !!

तन मन सब गुलाब से महके , मौसम हुआ गुलबिया !
यहां प्रकृति रंग भरती है , सच में अपने रंग से !!

तुमने दी सौगातें ऐसी , पल पल चहक रहे हैं !
हमको साथ निभाना होगा , जानो कई जनम से !!

बृज व्यास

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भगवती प्रसाद व्यास
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
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