साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो

साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो
●★●★●★●★●★●★●★●★●★
शिक्षामित्रों की लाशों पर जी भर के रंगोली खेलो
साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो
★★★
रोज हमारे तन की लाली
हो जाती है गम से काली
पीले-पीले मुखड़े देखो
जैसे मुरझाई हो डाली
रोजी-रोटी छीन लिए हो अब सीने पर गोली खेलो
साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो
★★★
रोज साथियों के मरने से
अंदर तक हम भी मरते हैं
त्योहारों की बात न करना
त्योहारों से हम डरते हैं
हमें मुबारक मत कहना तुम बना बना के टोली खेलो
साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो
★★★
हमको हिन्दू कहने वाले
कब होते हो दुख में शामिल
जाओ जाओ जश्न मनाओ
मेरे यारों के ऐ कातिल
तुम तो तिकड़म के राजा हो जनता तो है भोली खेलो
साँसों की दरकार इधर है तेरा क्या है होली खेलो

– आकाश महेशपुरी

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 0
Views 842

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share