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” साँझ देखो खिलखिलाई है ! अरुणिमा अम्बर पे छाई है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

April 10, 2017

थका हारा दिन ,
हो गया है पस्त !
रात की जवनिया ,
है सदा अलमस्त !
सृजन की चाहतें –
भोर होते मुस्कराई हैं !!

चित्र खींचे जो ,
परिश्रम तूलिका है !
जो किया हासिल ,
स्वप्न भूमिका है !
उपलब्धियों ने फिर –
खुशियां थपथपाई हैं !!

डरे हुऐ हम ,
अनिश्चय ने छला !
जुटा ली हिम्मत ,
बहुत कुछ है टला !
हमकदम का साथ –
ज़िन्दगी गुनगुनाई है !!

साथ ना छूटे ,
इतनी सी ठानी है !
दौड़ समय की ,
हमसे सयानी है !
कल क्या होना –
उम्मीदें कसमसाई हैं !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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