मुक्तक · Reading time: 1 minute

सहज खेल रहा है, असत्य संग l

सहज खेल रहा है, असत्य संग l
जीवन सीख लेगा, असत्य ढंग ll

प्यास, कब कोन दुःख है आन पड़े l
कब काले हो, असत्य मस्त रंग ll

अरविन्द व्यास “प्यास”

4 Likes · 22 Views
Like
You may also like:
Loading...