.
Skip to content

ससुराल की अनोखी रीत

Rashmi Porwal

Rashmi Porwal

अन्य

October 26, 2017

मेरी दी के ससुराल की अनोखी रीत !! एक बहु की कल्पना ……!!दी की शादी को आज लगभग पांच दिन हो गए , आज पहली बार उसे रसोई में जाने का मौका मिला । पहले तो घर मे रीति रिवाज और उसके बाद मेहमानों की इतनी भीड़ भाड़ , आज जाकर उसने पहली बार रसोई में कदम रखा था । सभी मेहमान लगभग जा चुके थे और शादी के बाद पहली रसोई के शगुन के नाम से आज दी को रसोई बनानी थी ।पर ये क्या ?? यहाँ तो पहले ही से सासु माँ खाना बनाने की तैयारी कर रही है , उसे लगा सासुमाँ नाराज़ है डरते डरते …… उसने सासु माँ से पूछा , माँ जी ये सब ?? आज तो मुझे ही सब बनाना है ना , सासु माँ ने कहा ” हाँ बहु बनाना तो है , लेकिन आज से हम दोनों साथ खाना बनायेंगी , अभी तीन चार दिन तो मुझे तुम्हे समझाना भी पड़ेगा कि हमारे यहां कैसा खाना बनता है , और दोनों ने मिल कर खाना बनाना शुरू कर दिया ।खाना बनाते बनाते उसकी सासु माँ ने उससे काफीबातें की , जैसे उसे सबसे अच्छा क्या बनाना आता है , सबसे ज्यादा खाने में क्या पसन्द है , उनके घर मे खाना कौन और कैसे बनाता है , पर इन सबके बीच , सासु माँ ने कुछ ऐसा कहा की दी की आंखे खुली की खुली रह गयी !! जब उन्होंने बताया कि हमारे यहाँ कोई बर्तन वाली नही आती ,बल्कि सब अपने अपने खाने के बर्तन खुद साफ करते है , दी ने आश्चर्य से उन्हें देखा , क्योंकि !! उसने ऐसा कभी कही भी नही देखा था या तो हर घर मे कोई काम वाली आती या ये सब घर की ही महिला को ही करना पड़ता है ।उसे बहुत उत्सुकता हुई ये जानने की, कि कैसे उनके मन मे ये विचार आया ?? तो उन्होंने बताया, पहले तो जब मेरी शादी हुई तब मेरी सासु माँ और मैं मिल कर सब काम खुद करते थे , फिर धीरे धीरे चार बेटो की जिम्मेदारी बढ़ गयी , तो हमने काम वाली बाई रखने का फैसला लिया । पर उसकी रोज रोज की छुटियों से हम परेशान रहने लगी । एक दिन सासु माँ ने भी बिस्तर पकड़ लिया । और रोज़ रोज़ की काम की झिक झिक सी रहने लगी तब मैंने तय किया कि सभी लोग अपना नाश्ता और खाना निपटा कर अपने बर्तन खुद मांज ले तो काफी सुकून हो जाएगा …… हाँ ! लेकिन खाना बनाने वाले बर्तन मैं खुद ही मांजती हूँ , बाकी सब अपने खुद । मैंने घर के और भी काम बाटने चाहे थे , पर बच्चों की पढ़ाई में व्यस्तता को देखते हुए नही कर पाई , कभी – कभी मेरी तबियत ठीक नही होने के कारण बच्चे अपने कपड़े भी खुद धोने लगे थे , रोज़ रोज़ उनके लिए भी ये मुश्किल था तो इसीलिये मशीन लेनी पड़ी , पर आज भी बच्चे अपने अंडर गारमेंट्स खुद ही धोतेहै , दी. ने ध्यान किया कि वो भी जब से इस घर मे आयी है उसने कभी बाथरूम में रोहित के कपड़े नही देखे । नही तो ये आम है , घर के मर्द नहाकर निकले नही , कि औरतों को उनके कपड़े धोने के लिएवही का रुख करना पड़ता है , और हां मैने अपने सब बच्चो को रसोई का इतना काम तो सिखा ही रखा है कि वो एक दो टाइम बिना किसी परेशानी के खाना बना सकते है , और हमे खिला भी सकते है …… अब तुम्हे भी !! कहते हुए सासु माँ ने मुस्कुराते हुए दी को देखा , फिर कहने लगी कि तुम्हे ये जानकर और भी आश्चर्य होगा जहां आज कल के दौर में भी कोई माँ अपने लड़को से रसोई का काम करना उसकी बेइज्जती समझती है , मेरी सासु माँ ने इसका पूरा समर्थन किया था ।आज दी. के सारे भ्रम दूर हो गए थे , जो शादी के नाम से ही उसके भीतर उसके अपनो ने ही पैदा कर दिए थे , जिसके कारण वो पिछले कितने ही महीनों से ढंग सो भी नही पायी थी । उन्होंने कहा मेरा मानना सिर्फ यही है …. कि केवल बेटियो को ही ससुराल के लिए तैयार न करे , बल्कि बेटो को भी भविष्य में किसी और की बेटी के लिए तैयार करे अगर आप उसका कदम से कदम मिला कर चलना उसका नौकरी करना पसंद करते है तो घर के काम मे भी उसका सहयोग करे जैसे वो आपका सहयोग करती है ।।बहुत छोटी सी ही बात है लेकिन घर के काम तो दोनों को ही सिखाये जाने चाहिये , जब लड़कियों को इसीलिए पढ़ाया जाता है कि भले वो भविष्य में नौकरी या न करे , लेकिन आवश्यकता पड़ने पर वो इतनी समर्थ हो कि उसे मजबूर न होना पड़े या किसी का मोहताज न रहना पड़े , तो फिर लड़को को केवल एक ही शिक्षा क्यो ,जबकि घर का काम तो जब तक जीवन है करना ही पड़ता है ।।

Author
Rashmi Porwal
kisi ki khushi ke sath Khush rehna sbse bda khushi ka kam h
Recommended Posts
पहली पहली बार
यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम... Read more
किसी के आसूंओं को पोंछ कर, हंसा देते हैं ! इस बार, दिवाली कुछ इस तरह मना लेते हैं !! बहुत शोर हो रहा है... Read more
*बेटी होती नहीं पराई ...*
बेटी होती नहीं पराई । पराई कर दी जाती है ।। पाल पोसकर जब की बड़ी । कहकर पराई क्यूँ विदा कर दी जाती है... Read more
एैसा पहली बार हुआ है
एैसा पहली बार हुआ है हमको तुमसे प्यार हुआ है ठंडी हवा के झोका जैसा सागर में तैरती नौका जैसा सावन में बरसती बरखा जैसा... Read more