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सवैया किरीट (मुरलीधर)

Sharda Madra

Sharda Madra

कविता

June 24, 2016

किरीट सवैया
चूनर छीन गयो कित मोहन, ढूंढत हूँ तुझको मुरलीधर
बांह मरोरत गागर फोड़त, आज उलाहन दूँ जसुदा घर
बोलत बाल सखा घर भीतर, श्याम रहो इत ही नट नागर
दर्शन पाकर धन्य भई अब रीझ गई प्रभु हे करुणाकर।

Author
Sharda Madra
poet and story writer
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