23.7k Members 49.9k Posts

सवालों ने तुम्हारे घर को ही थाना बना डाला

जो हमने की शिकायत तो उसे ताना बना डाला
सवालों ने तुम्हारे घर को ही थाना बना डाला

नशा इनमें अभी तक है पुरानी मय के जैसा ही
तुम्हारी आंखों को ही अपना पैमाना बना डाला

लगाया तुमने ऐसा रंग हमको है ये होली में
हमारे दिल को तुमने अपना दीवाना बना डाला

हमारे इस बुझे दिल मे जलाये दीप जो तुमने
ज़माने को न भाया उसने अफ़साना बना डाला

तसव्वुर में हमारे तो बसे हो सिर्फ़ तुम ही तुम
हमें तो प्यार ने खुद से ही अंजाना बना डाला

हैं जितनी यादें उतनी बोतलें हैं ‘अर्चना’ मय की
सजाया दिल मे उनको यूँ कि मयखाना बना डाला

11-03-2018
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

161 Views
Dr Archana Gupta
Dr Archana Gupta
मुरादाबाद
914 Posts · 94.3k Views
डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी प्यारी लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद भी,...