सलामत हो याराना

सलामत हो याराना
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करके बातें चार हम,सुकून पाते यार।
मन के कोमल भाव मिल,हो जाते गुलज़ार।।
हो जाते गुलज़ार,सलामत हो याराना।
दुनिया मुरीद प्यार की,यादों भरा अफ़साना।
महफ़िल हो आबाद,ख़ुशियों मिलें जी भरके।
लेते हैं सब जीत,अपनों से बात करके।

माला-मनकों से मिलें,एकता जिन्दाबाद।
प्रेम भाव मन पाल के,जीवन बनता शाद।।
जीवन बनता शाद,स्वर्ग-सा मिले नज़ारा।
अमृत-तुल्य ये जीत,कुर्बान जीवन हमारा।
रिश्ते मरहम सार,दर्दे-तम हो उजाला।
जब भी बनती एक,रिश्तों की हसीं माला।

कभी-कभी नाराजगी,भरे मन में विषाद।
थोड़ा झुकके पेड़-सम,भरलो फिर उन्माद।।
भरलो फिर उन्माद,आँधियाँ रुख बदलेंगी।
मौसम होगा साफ़,खुशियाँ तभी बरसेंगी।
सुन प्रीतम की बात,यारों सदा झूम सभी।
दूर करो मन हार,पाओगे ना दुख कभी।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम
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