Dec 26, 2020 · दोहे
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#सर्वश्रेष्ठ दोहे सात

निर्बल कोई भी नहीं,ख़ुद से है अनजान।
लकड़ी भीतर आग है,जले तभी पहचान।। //1//

औरों की सुनता चला,अपने भूल उसूल।
पहचानेगा कौन फिर, बन तेरे अनुकूल।।//2//

बातें करते लोग लख,परेशान हो चोर।
वो समझे तेरी करें,चुगली सब चहुँओर।।//3//

सच अच्छाई ख़ोजिए,अपने भीतर आप।
ख़ुशबू अंदर फूल के,जिससे उसका जाप।।//4//

नीयत अच्छी राखिए,होंगे सारे काम।
जैसी करनी आपकी,वैसा मिले मुक़ाम।।//5//

छलिया का आभार कर,जाना उसका भेद।
फूँक-फूँक कर पाँव रख,रहे न ख़ुद पर खेद।।//6//

देने वाला और है,पाने वाले आप।
पाकर देते और को,बढ़ता तभी प्रताप।।//7//

#सर्वाधिकार सुरक्षित दोहे
#दोहाकार-आर.एस.’प्रीतम’

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आर.एस. 'प्रीतम'
आर.एस. 'प्रीतम'
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🌺🥀जीवन-परिचय 🌺🥀 लेखक का नाम - आर.एस.'प्रीतम' जन्म - 15 ज़नवरी,1980 जन्म स्थान - गाँव... View full profile
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