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सर्प दंश

कवि कृष्णा बेदर्दी

कवि कृष्णा बेदर्दी

गज़ल/गीतिका

October 8, 2017

अब तो जहर को पीना पड़ेगा,
सर्प के दंश को सहना पड़ेगा,,

कोई भी मुझको विष दे दे तो,
चन्दन बनके खुश्बू देना पड़ेगा,,

जीवन मे प्रश्न से जड़ा हुआ मैं,
वक्त की हथेली में रहना पड़ेगा,,

पेड़ जैसा सीधा खड़ा हुआ हूँ मैं,
टूटते नदी के तट पर रहना पड़ेगा,,

पीता हूँ रोज मैं अग्नि के जलन को,
जीवन मे अग्नि-दंश सहना पड़ेगा,,

जलता हूँ लपेटों में चोटे मैं खाकर,
कंचन बनकर जीवन जीना पड़ेगा,,

उलझन के शब्दों में जन्म लिया हूँ,
अर्थ में धंसा हूँ मैं बाहर आना पड़ेगा,,

जिंदगी के जाल में सवालों में उलझा,
आज तक फंसा हूँ मैं जीना पड़ेगा,,

चलता हूँ धूप में धूप को पीता हूँ
चलते धूप में सूर्य-दंश सहना पड़ेगा,,

दिल के दर्द से कितना भी चिटकूं मैं,
जीवन मे दर्पण बन के रहना पड़ेगा,,

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Author
कवि कृष्णा बेदर्दी
कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

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