Jun 16, 2016 · कविता
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सरस्वती वन्दना

दे मातु शारदे

सबको प्रकाश की किरण, दे मातु शारदे।
ख़ुशियों की कोई अंजुमन, दे मातु शारदे।

विद्या का दान, सबकी झोलियों में डाल दे।
मिसरी सी इक ज़ुबान, बोलियों में डाल दे।
अधरों पे एक खिला सुमन, दे मातु शारदे।
सबको प्रकाश की किरण, दे मातु शारदे।

नफ़रत को भूलकर सभी से प्यार कर सकूँ।
जो दीन हीन हैं, उन्हें दुलार कर सकूँ ।
कोमल ह्रदय, भीगे नयन, दे मातु शारदे।
सबको प्रकाश की किरण, दे मातु शारदे।

इस मिट्टी और ज़मीन से जुड़ाव दे हमें।
भारत की भूमि से अमिट लगाव दे हमें।
हर जन्म में यही वतन, दे मातु शारदे।
सबको प्रकाश की किरण, दे मातु शारदे।

—–बृज राज किशोर

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Brijraj Kishore
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