सरस्वती-वन्दना (गीत)

सरस्वती-वन्दना
********************

हृदयांगन में चरण कमल रख कर उपकृत कर दे !
वीणावादिनि ! साधकजन को सृजन मनोहर दे !

धुन–लय-तान मधुर मुखरित हो,
जन-मन को ले मोह,
उन्नत हो आरोह स्वरों का
हिय-प्रिय हो अवरोह ।

झंकृत हों उर-तार साधना में नव-रस भर दे !
वीणावादिनि साधकजन को सृजन मनोहर दे !

हिल-मिल साधक रहें परस्पर,
रहे न तनिक बिछोह,
हृदयस्थल पुलकित कर दे माँ,
दूर रहे विद्रोह ।

तम हर नेह दीप्ति से उर को आलोकित कर दे !
वीणावादिनि ! साधकजन को सृजन मनोहर दे !

*************************************************
हरीश चन्द्र लोहुमी, लखनऊ (उ॰प्र॰)
*************************************************

Like Comment 0
Views 1.8k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119