सरस्वती वंदना

*सरस्वती वंदना*
सरस्वती माँ करें वंदना , हम तेरे ही बालक हैं।
दूर करो माँ वो अँधियारे, जो जीवन में बाधक हैं।

माँ निर्मल मति को कर देना, सदाचार अपनाऐं हम।
मधुर करो माँ वाणी ऐसी, सबका हिय हरषाऐं हम।
पाप कर्म से दूर करो माँ, हम तेरे आराधक है।
सरस्वती ……………………………………।।१।।

श्वेत वस्त्र है स्वर्णिम तन पर, कर में वीणा रखती हो।
सत्य स्वरूपी अंब शारदा, ज्ञान हृदय में भरती हो।
सतत ज्ञान आलोक करो माँ, हम विद्या के साधक हैं।
सरस्वती……………………………………..।।२।।

तुलसी, कालीदास, भारवी, सबने ही गुणगान किया।
कवियों ने कविता-रस पाने, तेरी ही माँ ध्यान किया।
‘इषुप्रिय’ उन दोषों को हर लो, जो चैतन्य विदारक हैं।
सरस्वती ……………………………………..।।३।।
————————————————————
इषुप्रिय शर्मा’ अंकित’
रामपुर कलाँ, सबलगढ(म.प्र.)

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