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सरस्वती वंदना

साहेबलाल 'सरल'

साहेबलाल 'सरल'

मुक्तक

January 27, 2017

हंस पे सवार माता
ज्ञान का प्रसार दे माँ
गले में स्वर वार माँ
श्रोताओं में वाह दे।।
मन में उमंग जागे
संग में तरंग जागे
मन मोर बन नाचे
ऐसा माँ सुभाव दे।।

वाचन में बात रहे
गायन में साथ रहे
संचालन में आज माँ
जोर का प्रभाव दे।।

वीणापाणी वीणा की
देवी हे माता शारदे
वाणी में वीणा की तान
तान में प्रवाह दे।

Author
साहेबलाल 'सरल'
संक्षेप परिचय *अभिव्यक्ति भावों की" कविता संग्रह का प्रकाशन सन 2011 *'रानी अवंती बाई की वीरगाथा' की आडियो का विभिन्न मंचो में प्रयोग। *'शौचालय बनवा लो' गीत की ऑडियो रिकार्डिंग बेहद चर्चित। *अनेको रचनाएं देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं में... Read more
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