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सरस्वती वंदना

ओ जय जय सरस्वती मैया, ओ जय जय सरस्वती मैया
तेरी शरण में आन पड़ा मां ले कर के नय्या
ओ जय जय सरस्वती मैया ओ जय जय सरस्वती मैया
१) स्वर सरिता मेरी बहती जाए ,
वीणा की झंकार दो,
ज्ञान दीप चम चम चमके मां,
ऐसा मुझको प्यार दो,
पतवार थाम लो हाथों में,
बन जाओ मेरी खिव्व्या,
ओ जय सरस्वती मैया ओ जय जय सरस्वती मैया,
२) आओ आओ कंठ विराजो,
गाऊ तुम्हारी आरती,
श्वेत्वर्णी कमल वासनी,
तुम ही सबकी सारथी,
तप तप कर मैं करूं साधना,
आंचल की कर दो छैयां,
ओ जय जय सरस्वती मैया ओ जय जय सरस्वती मैया,
मंदमती को मती हो देती,
दुर्बुद्धि को बुद्धि,
जो भी आता आपसे पाता,
भंडार न खाली रखती,
“अनुनय” गावे ध्यान लगावे,
बनकर छोटा भैया,
ओ जय जय सरस्वती मैया ओ जय जय सरस्वती मैया
“राजेश व्यास” (अनुनय)

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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको, काव्य धारा मेरी ,ऐसी बहती ।। राजेश व्यास "अनुनय"
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