घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

सरस्वती वंदना

मात शारदे सुनो जी, दृग खोल देख लो जी।
द्वार पे खड़ा हूं मात, तनिक तो ध्यान दे।।
ज्ञान चक्षु खोल माता, तम सारे हर माता।
मेरी मुश्किलों का कोई, हल तो निकाल दे।।
तू है ज्ञान दायिनी मां, सारे कष्ट हारिणी मां।
मेरे अपराध सारे, तनिक बिसार दे।।
कब से पुकारता मां, दूर से निहारता मां।
जग के झमेलों से तू, वार दे मां वार दे।।

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