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सरल हूं सरल लिखता हूँ

Dr ShivAditya Sharma

Dr ShivAditya Sharma

कविता

June 18, 2016

सरल हूं सरल दिखता हूं
सरल हूं सरल लिखता हूं

रोज देखता हूं अतरंगी दुनिया कभी हंसता कभी रोता हूं
अपने जीवन के अनुभवों को बना मोती कविता की माला में पिरोता हूं

सोचता नहीं हूं ज्यादा बस ख्यालों को बहने देता हूं
ढूंढता नहीं हूं शब्द कठिन अपनी बात बस भावों को कहने देता हूं

सजीले वाक्यों से कहां मेरा मेल है
मेरी कविता तो बस सादगी का खेल है

दिलों को आपके छू सकूं इसी कोशिश में रहता हूं
पानी का रंग हूं पानी की तरह ही बहता हूं

बड़े बड़े शब्दों से मेरा नाता नहीं
जो मन में आता मैं तो लिखता वही

क्योंकि

सरल हूं सरल दिखता हूं
सरल हूं सरल लिखता हूं

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Author
Dr ShivAditya Sharma
Consultant Endodontist. Doctor by profession, Writer by choice. बाकी तो खुद भी अपने बारे में ज्यादा नहीं जानता, रोज़ जिन्दगी जैसी चोट करती है वैसा ही ढल जाता हूँ।

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