दोहे · Reading time: 1 minute

सरलता

सीधे सुन्दर वृक्ष ही , सहते रहे कुठार ।
टेढ़े – मेढ़े वृक्ष पर , कौन करे प्रहार ।।
***
सीधे जन की नियति है , सह जाएं आघात ।
कुटिल जनों की प्रकृति , करें सदा प्रतिघात ।।

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