Skip to content

सरफिरे

राजेन्द्र कुशवाहा

राजेन्द्र कुशवाहा

कविता

February 28, 2017

बीच सफर में मै खुद को रोक दू कैसे।
सरफरो के हाथों जिंदगी सौंप दू कैसे ।।

वह मदहोस है मोहब्बत के जस्न मे,
अपने गम सुनाने के खातिर उसको टोक दू कैसे ।

जो खुद दरिया में डुब जाने से डरता है,
उसकी बात से दरिये मे खुद को झोक दू कैसे ।

वो धरती से खङे होकर सितारे गिनाता है,
पहुंच जाऊगा मै भी भरी महफिल मे सीना ठोक दू कैसे ।

मै कसम खा चुका कुछ कर गुजरने की,
किसी को देखकर खुद को रोक दू कैसे ।।

Share this:
Author
राजेन्द्र कुशवाहा
DOB - 12/07/1996 पता - मो.पो. - चीचली, जिला - नरसिंहपुर, तहसील - गाडरवारा, म. प्र. मोबाइल न. 7389035257 करना वहीं राजेन्द्र जो दुनिया को दिखाई दे। स्वरो को करना बुलंद इतने की लाखों मे सुनाई दे।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you